kalidas in hindi|kalidas story |कालिदास

कालिदास kalidas in hindikalidas story एक महान कवि जिसने अपनी रचनाओं से जनमानस को खासा प्रभावित किया Kalidas in hindi story

kalidas in hindi |कालिदास


कालिदास आज से लगभग दो हजार वर्ष पूर्व संस्कृत भाषा के बहुत बड़े कवि हो चुके थे। ये उज्जयिनी के राजा विक्रमादित्य की राजसभा के नौ रत्नों में एक थे।
इनके बचपन के जीवन का अभी तक कुछ भी पता नहीं चला है।

कहते हैं कि ये दशपुर के रहने वाले थे जिसे आजकल मन्दसौर कहते हैं।
उनके जन्म स्थान के बारे में भी अनेक भ्रांतियां हैं, अनेक मतभेद हैं।

कश्मीर के विद्वान् उन्हें कश्मीरी बताते हैं।

बंगाल के विद्वान् उन्हें बंगाली मानते हैं। कालिदास ने मेघदूत में उज्जयिनी का विशेष वर्णन किया है, इसलिए यह भी जाना जाता है कि वे उज्जयिनी (उज्जैन) के निवासी थे।

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उनके विवाह के सम्बन्ध में यह कहानी बहुत प्रसिद्ध है-
किसी राजा के विद्योत्तमा नाम की एक बहुत ही सुन्दर और विदुषी कन्या थी।
उसकी योग्यता की धाक दूर-दूर तक फैल गयी। उसका प्रण था कि जो कोई उसे
शास्त्रार्थ में हरा देगा, उसी से वह अपना विवाह करेगी।

बहुत से विद्वान् पण्डित और राजकुमार उससे विवाह करने की इच्छा लेकर आये, किन्तु शास्त्रार्थ में सब हारकर अपना-सा मुँह लेकर लौट गये।

तब सब पण्डितों ने मिलकर सलाह की कि किसी तरकीब से इसका विवाह किसी महामूर्ख से कराना चाहिए। वे अब ऐसे आदमी की तलाश करने लगे।
एक दिन उन्होंने देखा कि एक आदमी जिस डाली पर बैठा है उसी को काट रहा है।

पण्डितों ने सोचा-इसे डाली के काटने पर अपने गिरने और मरने का कोई डर नहीं
है। इससे अधिक मूर्ख कौन हो सकता है ?

ऐसा सोचकर वे बड़े आदर से उसे अपने
साथ ले अपने पास रखा। इससे उसका शरीर और रूप सुधर गया।

तब उन्होंने उससे अच्छा भोजन और अच्छे वस्त्र दिये तथा कुछ दिन कहा-

“हम तुम्हारा विवाह एक सुन्दर राजकुमारी से करायेंगे। इशारों में बात करना, मुँह से कुछ मत बोलना।”

वहाँ जाकर राजकुमारी से कहलवाया कि “हमारे गुरुजी तुमसे शास्त्रार्थ करने आए हैं। वे आजकल मौन धारण किए हुए हैं,
राजकुमारी शास्त्रार्थ हेतु तैयार हो गई। सभा में सब इकट्ठे हो गये।

राजकुमारी ने एक उँगली उठायी। मूर्ख ने सोचा कि यह मेरी एक आँख फोड़ना चाहती है।

उसने बदले में दोनों आँखें फोड़ने का इशारा करने के लिए अपनी दो उँगलियां उठाई।

पण्डितों ने अर्थ किया कि आप सृष्टि का कारण एक ईश्वर को मानती हैं, और ये पुरूष और
प्रकृति दोनों को ईश्वर मानते हैं। इस पर मूर्ख की विजय हुई।

फिर राजकुमारी ने अपनी पांच उँगलियां उठाई। उसने समझा कि यह मुझे चपत मारना चाहती है। इसलिए उसने मुक्का दिखलाया।

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पण्डितों ने अर्थ लगाया कि आप कहती हैं कि शरीर में पाँच इन्द्रियां बहुत बलवान हैं। ये कहते हैं कि उन्हें ज्ञान द्वारा मुट्ठी में यानि काबू में रखना चाहिए।
इस प्रकार राजकुमारी ने अनेक इशारे किये, किन्तु पण्डितों ने सबके ऐसे ही अर्थ लगा दिये। राजकुमारी हार गयी और उसका विवाह इस मूर्ख के साथ धूम-धाम से हो गया।


विवाह के बाद वह राजकुमारी के कमरे में गया। उसी समय बाहर ऊँट बोल रहा था।

राजकुमारी ने पूछा, “यह कौन जानवर बोल रहा है ?” वह हँसकर कहने लगा। “उट्ट है उट्ट।”

वह पण्डितों के धोखे को समझ गयी। उसे उन पर बहुत क्रोध आया और उसने उस मूर्ख को धकेलकर बाहर निकाल दिया और बोली-

“कुछ पढ़-लिख लो तो लौटना अन्यथा नहीं।”

वैसे वह बहुत मूर्ख था किन्तु यह बात उसके हृदय में चुभ गयी। वह बोला-“अब आया तो तुझसे विद्वान् बनकर आऊँगा।”


वह जंगल में चला गया। और सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए तपस्या करने लगा। जब कई वर्ष बीत गए और सरस्वती देवी प्रसन्न नहीं हुई, तब वह प्राण त्याग करने के लिए सरस्वती कुण्ड में कूद पड़ा।

सरस्वती उसी समय उसके पास आयी और उसे वरदान दिया। इसकी कृपा से वह शीघ्र ही धुरन्धर विद्वान् बन गया।

जब यह राजकुमारी के नगर में गया। द्वार पर जाकर उसने एक संस्कृत का श्लोक पढ़कर
राजकुमारी को पुकारा।

वह इनको इतना अच्छा कवि तथा विद्वान् देखकर बहुत प्रसन्न हुई। इनके चरणों में गिरकर क्षमा मांगी और बड़े आदर से महल में लिवाकर ले गयी।


यही मूर्ख, अपनी स्त्री के कारण प्रसिद्ध कवि कालिदास हुए। इस कहानी में कुछ सत्य हो या न हो, किन्तु इससे यह शिक्षा अवश्य मिलती है
कि मूर्ख भी अच्छी लगन और अभ्यास से एक बड़ा विद्वान् बन सकता है।

कालिदास की रचनाए

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महाकवि कालिदास विश्व साहित्य के सर्वश्रेष्ठ कवियों, नाटककारों में से एक थे।

उनकी जयंती मनाते समय उनके साहित्य से छात्रों को परिचित कराना, काव्य
सौन्दर्य उसकी कलागत श्रेष्ठताएँ आदि से अवगत कराने का प्रयत्न करना चाहिए।


कवि के समस्त काव्यों, नाटकों की जैसे-अभिज्ञान शाकुन्तलम्, विक्रमोर्वशीयम्, मालविकाग्निमित्रम्, रघुवंश महाकाव्यं, कुमार संभवम्, मेघदूतम् और ऋतु संहार।

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