Dahej Pratha in Hindi-दहेज प्रथा dowry system Essay

Dahej Pratha क्या है आइये Dahej Pratha in Hindi के बारे में Short Essay के रूप

में इसके स्वरुप व दुष्परिणाम को समझने का प्रयास करेंगे What is dowry system Meaning in Hindi

दहेज प्रथा Dahej Pratha – वर पक्ष द्वारा विवाह के समय, पूर्व या बाद में कन्या पक्ष से ऐठी गई मोटी रकम को दहेज कहा जाता है ।

यह रकम कई बार एक किश्त में और कई बार किश्तों में धीरे-धीरे मायके से निकलवाई जाती है।


दहेज प्रथा के कारण Dahej Pratha ke karan


(i)दहेज प्रथा Dahej Prathaके भयंकर रूप का कारण वर पक्ष की आर्थिक लोलुपता है। वे चाहते हैं कि पुत्र को योग्य बनाने, पढ़ाने-लिखाने में जो व्यय हुआ है, वह ब्याज के साथ कन्या पक्ष से वसूला जाये।


(ii) दहेज प्रथा का दूसरा कारण वर पक्ष में कन्या का होना भी है, क्योंकि वर का पिता भी एक कन्या का पिता है औरउससे भी अपनी बेटी की शादी में दहेज देना ही पड़ेगा, इसलिए वह अपने पुत्र की शादीमें उसकी वसूली करता है।


(iii) बेकारी भी दहेज का एक कारण कहा जा सकता है। वर्तमान संदर्भ में बेरोजगारी की समस्या
सर्वत्र व्याप्त है। ऐसे में कन्या पक्ष से मोटी रकम लेकर अपने व्यवसाय अथवा रोजगार की सम्भावनाओंको तलाशते है।


(iv) कन्या के पिता के मन में यह भावना होती है कि यदि वह ज्यादा दहेज देगा तो उसकी पुत्री ससुराल में अत्यधिक सुख से रहेगी।पिता के इस शुभ इच्छा के कारण भी यह प्रथा फली-फूली।


(v)’दहेज देने’ को लोग अपनी प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखते हैं। वे अन्य के सामने गर्व से कहते हैं कि हमने सारे सामान,रुपये आदि दिए हैं।


(Vi) कई बार ऐसा देखने में भी आया है कि अधिक कमाऊ वर प्राप्ति की चाह में लोग मोटी रकम देने हो जाते हैं अर्थात् अब यह ‘वर मूल्य’ हो गया है।


दहेज़ प्रथा के लिए कानून

dahej pratha Act


दहेज़ प्रथा Dahej Pratha के लिए भारतीय कानून मई 1962 में Dowry Prohibition Act बना हैइस कानून में अपराध साबित हो जाने पर गैर जमानती धारा लगाई जाती है तथा सश्रम कारावास व जुर्माने क
प्रावधान है .

दुष्परिणाम

dahej pratha ke dushparinam


-दहेज प्रथा के दुष्परिणाम निम्न हैं
(i)दहेज के अभाव अन्यथा कमी पर वधु को तरह-तरह की शारीरिक व मानसिक यातनाओं का शिकार होना पड़ता है।


(ii) दहेज की यातना से तंग आकर कई वधुएँ आत्महत्या करने को विवश हो जाती हैं ।


(iii) कई बार विवाह के मण्डप पर ही विवाद हो जाता है, बिना विवाह के ही बारात

लौट जाती है, जिससे समाज में अपमान सहन करना पड़ता है।


(iv) दहेज न लाने पर वधुओं को अनेक प्रकार के ताने सुनने पड़ते हैं, जिससे गृहस्थ जीवन दुःखों से भर जाता है।


(v) दहेज न दे पाने की स्थिति में कई माता-पिता अपनी पुत्रियों की हत्या करने तक को विवश हो जाते हैं। राजस्थान की घटनाएँ इसका ज्वलंत उदाहरण है।


(vi) दहेज की रकम नहीं जुटा पाने के कारण कई माता-पिता को अपनी पुत्री का विवाह अयोग्य, बेमेल व्यक्ति से कर देना पड़ता है।


दूर करने के उपाय- dahej pratha ke sujhav


(i) युवक-युवतियों को पुरजोर विरोध करना चाहिए।
(ii)अंतर्जातीय विवाह को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए तथा सामाजिक मान्यता दी जानी चाहिए।
(iii) शिक्षा का प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए।
(iv) सामूहिक विवाह का आयोजन किया जाना चाहिए।
(v) दहेज विहीन विवाह करने वालों का सामाजिक सम्मान किया जाना चाहिए।


(vi) सामाजिक संगठनों को दहेज के विरोध में एक मंच पर खड़ा होना चाहिए।
(Vii)सामाजिक जागरण के लिए अभियान चलाया जाना चाहिए।
(Viii) मीडिया द्वारा दहेज निरोध संबंधी विज्ञापनों का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। समाज को इसकी भयंकरता से परिचित कराया जाना चाहिए।


(ix)दहेज के लोभियों के लिये कठोर कानून बनाकर पूरी ईमानदारी से कार्यवाही की जानी चाहिए।
इसका महत्वपूर्ण सार यह है कि दहेज Dahej Pratha एक अभिशाप है, इसके निवारण के लिए हम सबको आगे आना होगा और कानून की मदद करनी होगी,
जिससे दोषियों पर कठोर कार्यवाही हो सके और हमारा समाज इस दोष से मुक्त हो।

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