अजीम प्रेमजी की जीवनी-Biography of Azim Premji in Hindi

भारत के मशहुर् उद्योगपति विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी की जीवनी -Biography of Azim Premji in Hindi की बात करेंगे यह Biography आपको जरूर motivate करेगी

Biography of Azim Premji अजीम प्रेमजी की जीवनी


जन्म एवं बचपन-Biography of Azim Premji
विप्रो कॉरपोरेशन के चेयरमैन अजीम प्रेमजी का जन्म 1945 में महाराष्ट्र में हुआ था।
उनकी पढ़ाई अमेरिका के प्रसिद्ध स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में हुई थी। उनके पिता ने 1945
में महाराष्ट्र में एक वनस्पति तेल की मिल की स्थापना की थी। लेकिन 1966 में हृदयघात के
कारण उनके पिता की मृत्यु हो गई। अजीम प्रेमजी उस समय स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय में ही
पढ़ रहे थे। उनके पिता की अचानक मौत ने उन्हें पिता के व्यवसाय में शामिल होने को
मजबूर कर दिया। अजीम प्रेमजी 1966 में 21 वर्ष की आयु में विप्रो कॉपरेशन में शामिल
हुए।
वे साधारण सोच तथा उच्च विचारों वाले व्यक्ति थे। उनका व्यक्तित्व जमीन से जुड़ा
हुआ था। अपने इसी व्यक्तित्व की वजह से वह बहुत प्रसिद्ध भी रहे। उनके नेतृत्व में 70
मिलियन की कंपनी तीव्र गति से विकास करती हुई 900 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई।
इसने सेवाओं, प्रौद्योगिकी उत्पादों और उपभोक्ता उत्पादों में अच्छा व्यवसाय किया और
विश्व में अपना नाम कमाया।

मशहूर उद्योगपति


अजीम प्रेमजी विश्व के युवा उद्योगपतियों के आदर्श है। उन्होंने विश्व के उद्योगपतियों
के बीच भारत के उद्योगपतियों की महत्ता को स्थापित किया। अजीम प्रेमजी ने अपने दल में
उच्च गुणवता और योग्यता वाले लोगों को शामिल किया। भारत की प्रमुख व्यावसायिक
पत्रिकाओं में से एक बिजनेस टूडे ने विप्रो को भारत की दूसरी सबसे बड़ी सफल कंपनी माना
है। पूँजी के दृष्टिकोण से विप्रो भारत की दस प्रमुख कंपनियों में से एक है। विश्व की प्रमुख
पत्रिका फार्च्यून ने अजीम प्रेमजी को अमेरिका से बाहर के विश्व में 25 शक्तिशाली या
प्रमुख उद्योगपतियों में से एक माना है। प्रेमजी ने विप्रों को प्रौद्योगिकी कंपनी से वृहत् सार्वजनिक
व्यावसायिक कंपनी में स्थापित करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की है। भारतीय अर्थव्यवस्था
के दृष्टिकोण से विप्रो का विश्व में 27 वां स्थान है ।


फार्च्यून पत्रिका के अनुसार इस सर्वेक्षण में विश्व के प्रमुख कंपनियों और उनके
प्रमुखों को चुना गया है। जिनमें से चार वरीयता क्रम में दस लोगों की सूची में शामिल है।
इसमें सोनी के नोब्युमि ईदी सूची में दूसरे स्थान पर है। अजीम प्रेमजी का विश्वास है कि
विप्रो की सफलता का प्रमुख तत्त्व उसके आधारभूत मूल्यों को प्रमुखता देना है। लेकिन इसके
साथ ही साथै विप्रो के प्रमुख की नेतृत्व क्षमता तथा योग्यता भी विप्रों के विकास के लिए
महत्त्वपूर्ण कारक है। जो अजीम प्रेमजी की नेतृत्व कुशलता दर्शाती है।

विप्रो के संस्थापक

अजीम प्रेमजी विप्रो के संस्थापक चेयर मैन है जिनके नेतृत्व में यह कंपनी पूँजी बाजार की प्रमुख कंपनी बन गई अजीम प्रेमजी का मुख्य उद्देश्य अपने उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में
रखना है। वे इसके प्रति काफी जागरूक रहते हैं। उनके अनुसार उसी की संतुष्टि पर कंपनी
लाभ कमा सकती है। विप्रो के सीईओ विवेक पॉल का अजीम प्रेमजी के बारे में कहना है
अपने आप को ऊपर उठाने वाले व्यक्ति को मैंने देखा है। वह अपने आप को प्रारंभ में ले गए
और वहाँ से विकास करते हुए पूरे विश्व में भारत का नाम रोशन किया। मैं इसके लिए उनका
पूरा सम्मान करता हूँ।
विप्रो कंपनी एक वृहत् परिसर में स्थित है। उस परिसर को इस प्रकार विकसित किया
गया है, जैसे वह कोई शहर हो, उसमें आवश्यकता के सभी साधन उपलब्ध है। अगर कोई
वहाँ जाए तो ऐसा महसुस होगा कि आप किसी शहर में घूम रहे हो।

इन्फोटेक विभाग की स्थापना

सन् 1984 में विप्रो कंपनी को बहुत बड़ी सफलता मिली जब विप्रो ने अपना इन्फोटेक
विभाग की स्थापना की। इसकी स्थापना सॉफ्टेवयर निर्माण के क्षेत्र में की गई थी। विप्रो
अपने निर्यात का 65 प्रतिशत अमेरिका को करता है। यह भारत में एक प्रमुख ब्रांड के रूप में
स्थापित हो चुकी है। इस कंपनी ने अमेरिका में भी एक प्रमुख ब्रांड के रूप में अपनी साख
स्थापित कर ली है। अजीम प्रेमजी ने अमेरिका में एक आधारभूत प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम
की स्थापना की जिसका नाम विप्रो केयर है। इस फोंडेशन की स्थापना 1000 मिलियन
रुपये की लागत से की गई है। इसका उद्देश्य प्रत्येक विप्रो कर्मचारियों में रचनात्मकता और
सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना का विकास करना था। कम समय में ही विप्रोकेयर ने
बच्चों के लिए बहुत कार्य किये। इसके साथ ही उसके कर्मचारियों ने भी उन्हेंन खुश करने का
अनुभव प्राप्त किया। गुजरात में आए भूकंप के लिए विप्रो ने एक सहायता कोष की स्थापना की। इसके तहत पीड़ितों को सहायता राशी उपलब्ध करवाई गई।


कार्य के आधारभूत तत्त्व

अजीम प्रेमजी का कहना है “राजस्व के क्षेत्र में हम विश्व की प्रथम दस आईटी
कंपनियों में से एक है।” वे पुन: कहते हैं

“अब हमें बाजार के मूल्य और गुणवता की बृहत्दृष्टिकोण में विश्व की प्रथम दस कंपनियों में शामिल होना है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विप्रो के चैयरमेन का कहना है कि यह केवल एक ही तरीके से संभव हो सकता है, वह है काम, कार्य और कार्य।

अगर कठिन मेहनत नहीं करेंगे तो हम इस स्थान पर नहीं रह पाऐंगे। जिस स्थान पर आज हम है। काम ही एक ऐसा साधन है जिससे हम इस प्रतियोगी वातावरण में स्वयं को बनाए रख सकते हैं। वे स्वयं बहुत काम करते हैं और उससे अलग होना उसके लिए संभव नहीं है।

अपने कठिन समय में भी वे अपने खाली समय में या जब भी मौका मिलता है वह अपना ई-मेल चैक करते हैं। उनका कहना है, “अगर आप बड़े होते हैं तो आपको अधिक से अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलता है।

उनके इस स्वभाव के कारण कंपनी के कर्मचारियों को आगे बढ़ने का साहस मिलता है। आज विप्रो
विश्व की प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी बन गई है। इसके साथ ही वर्ष 2000 के अक्टूबर माह से विप्रो को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की सूची में शामिल किया गया है।

यह सब अजीम प्रेमजी के द्वारा भारत के पुरातन प्रबंधन व्यवस्था को अस्वीकार कर उसकी जगह कुशल प्रबंधन व्यवस्था अपनाए जाने से संभव हो पाना है। भारत की जाति व्यवस्था के स्थान पर
उन्होंने सार्वभौमिक मूल्यों पर आधारित एक आधुनिक व्यवस्था की स्थापना की है। इसके
कारण ही वे एक मुसलमान होते हुए भी सभी जातियों से परे व्यवस्था को कार्यरूप दे पाए।
उनका कहना है, “अपने कार्यों के दौरान हमने मानवता और ईमानदारी के महत्त्व को समझा।
विप्रो के प्रत्येक व्यावसायिक कार्डों के पीछे स्लोगन लिखा होता है “मानवता को ध्यान में
रखते मैं वादा करता हूँ कि उपभोक्ताओं की सेवा ईमानदारी के साथ करूँगा।

Biography of Azim Premji

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